30 धाकड़ एटीट्यूड शायरी

 1: हम दुनिया से अलग नही हमारा दुनिया ही अलग है।



2: हमको मिटा सके ये जमाना में दम नही हम से जमाना है जमाना से हम नही।



3: ना पेसी होगा न गहवा होगा अब जो भी हम से उलझेगा बस सीधा तबाह होगा।



4: अकेले है कोई गम नही जहा इज्जत नही वहा हम नही।



5: हम कोई सायर नही जो कोई किताब लिखेंगे हम बादशाह है जब भी लिखेंगे इतिहास लिखेंगे।



6: ये मंजिल ही बंदनसीब थी जो हमे पा ना सकी वर्ना जीत की क्या औकात जो हमें ठुकरा दे।



7: सुधरी है तो बस मेरी आदतें वरना मेरी सोच वो तो आज भी तेरी औकात से ऊंची है।



8: अरे तुम दुश्मनों की बात करते हो हमे तो अपने देख कर जल जाते है।



9: वक्त है बदल जाएगा आज तेरा है कल मेरा आएगा।



10: चलो आज फिर मुस्करा जाये बिना माचिस के कुछ लोगो को जला जाये।



11: मामूली सा सवाल ही मै फिर भी लोग कहते है तेरा कोई जवाब नही।



12: भाड़ में जाये ये लोग और लोगो की बाते हम वैसे ही जायेंगे जैसे हम चाहते।



13: जंगल के सूखे पत्ते जैसे है हम जिस दिन जलेंगे पूरी जंगल जला देंगे।



14: जिंदगी अपनी अंदाज में जीनी चाहिए दुसरो को तो कहने पर तो सेर भी सर्कस में नाचते है।



15: विकने वाले और भी है जाओ खरीद लो हम कीमत से नही किस्मत से मिलते है।



16: अगर फितरत हमारी सहने की नही होती तो हिम्मत तुम्हारी कुछ कहने की नही होती।



17: खुश रहो या खफा रहो हम से दूर और दफा रहो।



18: चल जिंदगी की नई सुरवात करते है जहा से खतम हुई वही से स्टार्ट करते है।



19: मेरी एटीट्यूड मेरी निशानी है आओ हवाली में अगर कोई परेशानी है।



20: जिंदगी का वसूल बना लो जलने वालो को और जला दो|



21: जिंदगी में बहुत कष्ट है फिर भी हम मस्त है।



22: जो सुधार जये वो हम नही और कोई हमे कोई सुधार दे इतना किसी में दम नही।



23: चाँद हो या सूरज चमकते सब है अपना वक़्त आने पर।



24: शायद मै इसलिए पीछे हूँ, मुझे होशियारी नही आती बेशक लोग ना समझे मेरी वफादारी मगर मुझे गद्दारी नहीं आती।



25: सर से लेकर पैर तक ताकत लगा लेना साजिशें अगर मेरे खिलाफ हुई तो बीमा अपना भी करवा लेना।



26: जिनको मेरी फिक्र नहीं उनका अब कोई जिक्र नही।



27: हम आज भी अपने हुनर में दम रखते है, छा जाते हैं रंग जब हम महफिल में कदम रखते है।



28: इश्‍क और हमारा ताल्लुक हुआ ही नही क्‍योंकि इश्‍क गुलामी चाहता है और हम आजादी।



29: यह जो सर पर घमंड का ताज रखते हैं सुन लो दुनिया वालों हम इनके भी बाप लगते है।



30: शराफत की दुनिया का किस्सा ही खत्म अब जैसी दुनिया वैसे हम।

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